Kapalkundala (Hindi)Author/s:

कपालकुंडला एक दर्दभरी प्रेम-कहानी है, जो साज़िश और रहस्य से भरपूर है, जिसे बांग्ला साहित्य के सबसे प्रतिष्ठित लेखकों में से एक, बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने रचा है। कापालिक, जो एक तांत्रिक है, ने कपालकुंडला को उस बेटी की तरह पाला है जो उसे कभी नहीं मिली। एक दिन उनके जीवन में नवकुमार का प्रवेश होता है। तब तक कापालिक की सुरक्षा में रही कपालकुंडला उस पुरुष के प्रति आकर्षित हो जाती है। जब उसे पता चलता है कि कापालिक एक देवी से वरदान पाने की आशा में नवकुमार की बलि देने की योजना बना रहा है, तो कपालकुंडला उसकी जान बचा लेती है। दोनों एक-दूसरे के प्रति अपने प्रेम का इज़हार करते हैं और पति-पत्नी की तरह साथ रहने लगते हैं। इस विश्वासघात को सहन न कर पाने पर कापालिक इस भरोसे के टूटने का बदला लेने की योजना बनाता है। वह झूठ का जाल बुनकर नवकुमार को बहकाता है, और उसे कपालकुंडला के चरित्र पर संदेह करने पर मजबूर कर देता है। उसका क्रोध इतना बढ़ जाता है कि उसके मन में उसे मार डालने के विचार तक आने लगते हैं। कपालकुंडला के भाग्य में क्या लिखा है? क्या वह उसी के हाथों मारी जाएगी जिससे वह प्रेम करती है? क्या कापालिक अपना बदला पूरा कर पाएगा?

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