Devi Chaudharaani (देवी चौधुरानी)Author/s:

देवी चौधरानी बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय का 1884 में प्रकाशित एक क्लासिक बांग्ला उपन्यास है, जो 18वीं सदी के अंत के बंगाल — अंग्रेज़ी शासन, अकाल और संन्यासी-विद्रोह के अशांत दौर — की पृष्ठभूमि पर लिखा गया है। यह एक साधारण, ठुकराई हुई युवती के असाधारण साहसी नायिका में बदलने की कहानी है, जो अपनी बुद्धि, साहस और निडरता से समाज की रूढ़ियों को चुनौती देती है। भारतीय साहित्य के सबसे प्रेरणादायी और स्वतंत्र स्त्री-पात्रों में गिनी जाने वाली यह रचना त्याग, न्याय और आत्मबल जैसे मूल्यों को उभारती है, और आज भी पाठकों को उतना ही रोमांचित करती है जितना अपने प्रकाशन के समय करती थी।

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136 pages

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