Sanyam (संयम) – HindiAuthor/s:

संयम एक ऐसे पेंटर की कहानी है, जो जीवन की भीड़ में भीतर से बिल्कुल अकेला है।

वह रंगों से अपनी दुनिया बनाता है, लेकिन जब वे भी चुप हो जाते हैं, तो उसे शब्दों का सहारा लेना पड़ता है।

उसकी एक दोस्त उसे कहती है—”लिखो। जो तुमने महसूस किया, जो कह नहीं पाए—उसे लिखो।”

यह उपन्यास उसी आत्म-संवाद की यात्रा है।

यह केवल एक कहानी नहीं है, बल्कि एक चित्रकार के भीतर की वह आवाज़ है, जो कभी पेंटिंग के ज़रिए नहीं निकल पाई।

यह उस गहरी खामोशी की भाषा है, जिसे हम सब कभी न कभी महसूस करते हैं—चाहे हम कलाकार हों या नहीं।

क्या एक लेखक एक पेंटर को समझ सकता है? क्या हम कभी किसी के रंगों की भाषा पढ़ सकते हैं? यही प्रश्न इस किताब के हर पन्ने में झलकता है।

संयम मानव कौल का सबसे आत्मिक और अंतरंग उपन्यास है—जहाँ कैनवास शब्द बन जाता है, और अकेलापन कहानी।

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192 pages
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