Chandranath (Hindi)Author/s: Sarat Chandra Chattopadhyay
चंद्रनाथ था एक भावुक युवक। भावुकतावश उसने एक गरीब माँ की लड़की सरयू से शादी कर ली। कुछ दिनों बाद यह डर हुआ कि समाज सरयू को अपवित्र कर देगा। उसका अपराध यही था कि उसकी माँ एक लंपट नवयुवक के प्रेम में फँसकर भाग आई थी। इसलिए वह वेश्या थी और सरयू हुई वेश्या की लड़की।चंद्रनाथ ने जब सुना, तो समाज के डर से सरयू का परित्याग कर देने को राजी हो गया। सरयू दया और प्रेम की मूर्ति थी। उसका संस्कार ऐसा था कि पति पर वह ईश्वर जैसी श्रद्धा-भक्ति रखती थी। पति की आवरू पर वह आँच नहीं आने देना चाहती थी। इसलिए उसने स्वयं जहर खा लेने का प्रयास किया। किंतु समय पर वह ऐसा न करने के लिए मजबूर हुई, क्योंकि वह माँ बनने वाली थी।फिर सरयू की सहनशीलता के सामने सबको झुकना पड़ा। अंत में चंद्रनाथ की हिम्मत हुई और वह सरयू को घर ले गया—जो बहिष्कृत होने के कारण काशी चली आई थी। किसी पर कोई आँच नहीं आई।
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