Devdas (Hindi)Author/s: Sarat Chandra Chattopadhyay
शरतचंद्र चट्टोपाध्याय का देवदास एक हृदयविदारक प्रेम कहानी है, जिसे 1917 में प्रकाशित होने के बाद से बार-बार पढ़ा और सुनाया जाता रहा है। यह कहानी 1900 के दशक के आरंभिक वर्षों के बंगाली समाज का चित्रण करती है और जातिगत ऊँच-नीच जैसी सामाजिक समस्याओं पर प्रकाश डालती है।
बचपन से एक-दूसरे को जानने वाले देवदास और पारो एक-दूसरे के बेहद करीब हैं। उनकी दोस्ती जल्द ही प्रेम में बदल जाती है और दोनों जीवन भर साथ रहने का वादा करते हैं। लेकिन दुर्भाग्य से, उनका मिलन निषिद्ध है। देवदास एक घमंडी और धनी बंगाली ब्राह्मण परिवार का बेटा है, जो अपने बेटे को अपनी जाति से बाहर विवाह करने की अनुमति देने से साफ इनकार कर देता है।
जब पार्वती की शादी किसी और पुरुष से कर दी जाती है, तो दोनों प्रेमी एक-दूसरे से जुदा हो जाते हैं। इसके बाद देवदास निराश होकर कलकत्ता लौट आता है, जहाँ उसकी मुलाकात आकर्षक और खूबसूरत तवायफ चंद्रमुखी से होती है। देवदास शराब के नशे में डूबा हुआ अपनी पारो की याद में तड़पता रहता है, वहीं चंद्रमुखी इस अभागे और अंतर्मुखी पुरुष के प्रेम में पड़ जाती है।
जब चंद्रमुखी देवदास से अनंत प्रेम करने की कसम खाती है, तब क्या होता है? इस दुखद प्रेम त्रिकोण का क्या परिणाम होगा?
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